Wednesday, October 21, 2020

कुछ कविताएं/ Poems

 आदर्श


कितना मुश्किल होता है आदर्श को जीना
कहना आसान है मुश्किल है करना
अस्तित्व पर ही लग जाता है ग्रहण आदर्श के
जब सामना पड़ता है यह धर्मसंकट के
लोग लगते उठाने प्रश्न इसकी उपयोगिता पर कसते हैं जब फायदे , नुकसान की कसौटी पर
किंतु क्या आदर्श है उनके लिए
जो भागते पीछे सदा सुख के लिए
देखते अस्तित्व को अपने यहीं तक आप जो
यह है नहीं आदर्श का पथ आप के फिर साथ तो

दाम्पत्य

दाम्पत्य सुखमय है तो फिर क्या स्वर्ग से है क्या प्रयोजन ?
है अगर प्रतिकूल तो फिर नर्क से है क्या प्रयोजन ?

अनासक्त कर्मयोग

फूल केवल फूल होता है ।
यह खिलता है क्योंकि यह खिलता है ।
यह कब खुद के बारे में सोंचे ।
यह कब चाहे कि इसे कोई देखे ।

आत्मप्रशंसा

अपनी कहानी में तो होता हर कोई ही राम है ,
पर वही श्री राम है जो गैर की नजरों में हो ।

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