जीवन एक यात्रा है
सदा गतिमान ,
जन्म से मृत्यु तक चलती है अविराम
बदलते रहते हैं लोग और नजारे ,
कभी सच में
कभी केवल हमारी नजरों में ,
निगाहें हमारी होतीं जिसकी जिम्मेदार।
एक सफर जहाँ सब ने तय कर रखी हैं
अपनी अपनी मंजिलें , अपने अपने रास्ते ।
ये मंजिलें ही अब जीवन हैं
इन्हें तय किसने किया ?अब याद नही !
पिता , माता , दादा , चाचा ,
पड़ोसी , रिश्तेदार या कोई और ?
याद नहीं । क्या फर्क पड़ता है ?
जरूरत , विलासिता , शान , इज्जत किस लिए ?
पता नहीं याद नही !
अब केवल मंजिल पता है और रास्ता याद है ।
अपनी धुन में चलता जा रहा है ।
अचानक बगल से निकली एक तेज रफ्तार गाड़ी
चमचमाती नयी , मेरे से अच्छी , मेरे से तेज ,
यह कैसे हो सकता है ? उसकी ये मजाल ?
बढ़ा दी मैने स्पीड और कुछ ही देर में
पछाड़ दिया उसे , अब चैन मिला
लेकिन यह क्या
फिर एक निकला ? फिर से एक संघर्ष ।
जीवन , विकास , इतिहास और वर्तमान ,
देश , समाज , परिवार और ' स्वयं ' के वास्ते
मेरी मंजिल मेरा रास्ता ?
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