कविता , बलात्कार
क्यों खून खौलता है तुम्हाराकिसी बलात्कार की खबर सुनकर ??
क्योंकि ,
बलात्कार एक जघन्य अपराध है ?
यह स्त्री की अस्मिता पर आघात है ?
यह उसकी इज्जत से खिलवाड़ है ?
यह उसके खिलाफ एक अत्याचार है ?
या तुम्हारा पुरुषत्व जगता है
एक विशेष प्रकार की हिंसा पर ?
तुम इंतजार करते हो कि
यह अत्याचार पहुंचे इस चरम पर
तब जागोगे तुम और तुम्हारी अंतरात्मा।
पहले इसके तुम भी करते हो बलात्कार
जाने अनजाने हर दिन हर सप्ताह
जब तुम बलात् रोकते हो उसे जन्म लेने से,
बराबरी करने से , पढ़ने से और बढ़ने से ,
जब जबर्दस्ती पढ़ाते हो उसे ऊँच- नीच ,
और अंतर मर्द - औरत के बीच ,
निर्भर रहना पुरुषों पर
रखवाली और रोटी के लिये ।
सिखलाते हो चुप रहना
अन्याय के खिलाफ ,
घर की इज्ज़त के लिये ।
और उसकी इज्जत?
बंद करो यह व्यर्थ विलाप , अनर्गल प्रलाप ,
आरम्भ करो सार्थक प्रयास ,रोको हठात् ,
इस बलात्कार को कर के रोज प्रयास
अपने घर में , पड़ोस में और कार्यस्थल पर ।
मत करो इंतजार एक और खबर आने की
और फिर से यह सब दुहराने की ।
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