मैं क्यों लिखता हूँ ?
कलकल नदियाँ क्यों बहती हैं ?
फूल झूमकर क्यों खिलते हैं ?
पंछी कलरव क्यों करते हैं ?
चाँद चाँदनी क्यों बिखेरता ?
लगे भले सब को बेमानी
बातें पहली सी, पुरानी
कही गयी हों अगणित बार ।
मेरे लिए तो है इकबार ।
कुछ भाव तीब्र हो जाते हैं
कुछ बातें रुक ना पाती हैं ।
कुछ पाप किया सा लगता है
जब व्यक्त न दिल कर पाता है ।
अर्थ लाभ की चाह नहीं है
कीर्ति कामना मुझे नहीं है
अर्थयुक्त क्या यह जीवन है ?
अंतः सुख की चाह अभी है ।
लेखन चिंतन का वाहन है
व्यापक अनुभव का साधन है ।
प्राप्त एक जीवन वेला में
अगणित जीवन को जीना है ।
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