The Art of a Happy Life
Happiness is our true nature.
Wednesday, October 21, 2020
कविता, ईश्वर-वंदन
उसने मुझे बनाया ,
या मैने उसे बनाया ?
इतना क्यों सोचूं ?
क्या फर्क पड़ता है ?
हम अलग ही कहाँ हैं
एक दूजे से !
वही तो मैं हूँ !
मैंही तो वह है !
बूँद और सागर के जैसे ।
कण और धरा के जैसे ।
वृक्ष और वन के जैसे ।
मिट्टी और घड़े के जैसे ।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment